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Thursday, 11 May 2017

बिजली गुल

इक शाम को  बड़ी  अजब सी बात  हुई
बिजली गुल हो गई , जो थोड़ी बरसात हुई
बैटरी ख़त्म जब हो गई अपने स्मार्ट यार की ,
इन्तहा ही हो गई जब इंतज़ार की 

तब देखा अपनी खिड़की से अजीब वाक़या
लोग आपस में भी करने लगे बातें यहाँ 

कोई मंदिर के किनारे खेलते अंताक्षरी
चल पड़े किस्से कहानी और शेर - ओ - शायरी

निकल आये कई अनोखे खेल वो पुराने
ऑफलाइन लगे लोग जीतने जिताने 

आज तो मानो की जैसे समय पीछे आ गया
मशीनों को छोड़ इंसान घर के नीचे  आ गया 

अब तो मैं ये सोचता हूँ , क्या खूब वो करामात हो
लोग फिर इंसान हो जाएं जो रोज़ ऐसी बरसात हो  ;)
-आयुष  :)  Ayush Jain


Monday, 21 March 2016

लकीरों का घर

जो खतम बचपने का पहर हो गया है ,
ये माथा लकीरों का घर हो गया है .

समझ जो है पा ली अब अच्छे बुरे की ,
अब अच्छा बुरा ये शहर हो गया है .
जो है समझदारी अब दुनियागिरी की ,
वो मासूमियत को ज़हर हो गया है .

समझ में है आने लगी ज़िंदगी अब ,
जो बिल्कुल ही ऐसी नहीं दिखती थी तब.
वो बिन सोचे समझे की खिलखिलाहटें
थीं ,
कहीं दूर जा कर जो हैं बस गयीं अब .
मुस्कुराहटो पर भी मानो 'कर ' हो गया है ,
ये माथा लकीरों का घर हो गया है .

वक्त तब गुज़र जाता था खुद की बक बक में ,
वक्त अब नहीं है खुद से पल भर बतियाने को.
दिन भर निकल जाता था मिट्टी के घर बनाने में ,
अब दिन भर निकल जाता है 'सच का घर' बनाने को.
होड़ हुड़दंग जो मचा है
सफल बन ने को,
वो मन के सुकूं को कहर हो गया है .
.
जो खतम बचपने का पहर हो गया है ,
ये माथा लकीरों का घर हो गया है .

आयुष
:')

Wednesday, 16 March 2016

मेरी सुन !

मत भटक मेरे तू मीत मेरी सुन,
पहले मन की प्रीत तेरी सुन !
छोटी हार से सीख बड़ा
सा ,
होगी तेरी जीत मेरी सुन !

माना मन विचलित है तेरा ,  चल हलचल सी रहती है
जिन आंखों से सपने देखे
वो आंखे नम रहती हैं !
मन करता है कोई हमराही आकर के समझा दे,
मन में आत्मविश्वास जगा के राह ठीक सी दिखला दे!
पर सुन इस दुनिया में
कोई जीवन आसान नहीं ,
सबकी अपनी तकलीफें
अपने अपने दर्द गमी !

तो तू खुद ही सोच ये कैसे तुझको प्रेरित करे कोई !
खुद से अच्छी प्रेरणा तुझको ना दे सकता और कोई !
जो है बस सब तू खुद ही है
खुद का खुदा तू खुद ही है
मत तक रे तू राह किसी की
करना सब कुछ खुद ही है !

उठ जाग खड़ा हो पैरो पर
और चल पड़ मंजिल पाने को ,
खुद से खुद में जोश फूंक ले
सफलता की ये रीत मेरी सुन !
क्या है मन की प्रीत तेरी सुन,
होगी तेरी जीत मेरी सुन !!



- आयुष