Showing posts with label motivational poem. Show all posts
Showing posts with label motivational poem. Show all posts

Thursday, 11 May 2017

बिजली गुल

इक शाम को  बड़ी  अजब सी बात  हुई
बिजली गुल हो गई , जो थोड़ी बरसात हुई
बैटरी ख़त्म जब हो गई अपने स्मार्ट यार की ,
इन्तहा ही हो गई जब इंतज़ार की 

तब देखा अपनी खिड़की से अजीब वाक़या
लोग आपस में भी करने लगे बातें यहाँ 

कोई मंदिर के किनारे खेलते अंताक्षरी
चल पड़े किस्से कहानी और शेर - ओ - शायरी

निकल आये कई अनोखे खेल वो पुराने
ऑफलाइन लगे लोग जीतने जिताने 

आज तो मानो की जैसे समय पीछे आ गया
मशीनों को छोड़ इंसान घर के नीचे  आ गया 

अब तो मैं ये सोचता हूँ , क्या खूब वो करामात हो
लोग फिर इंसान हो जाएं जो रोज़ ऐसी बरसात हो  ;)
-आयुष  :)  Ayush Jain


Monday, 16 May 2016

संतोष

शाम की चंचलता में , मन मेरा वीरान था.
हर आज मैं अपने 'कलों' से परेशान था.
जो बीत गया वो नीरस था,
जो आयेगा वो नीरस है.
निकल गया मैं बाहर सोच ये ,
क्या सब में इतना धीरज है ?
कौतहूल को पहला मील का पत्थर घर के पास मिला, कूडा कर कट बीनता बच्चा ,
लेकर चेहरा खिला खिला 
मैने पुछा पढो लिखो ये कचरा क्यूं उठाते हो,
क्या कुछ बनना नहीं चाहते ?
स्कूल क्यू नहीं जाते हो ? 
वो मुझको तक कर के बोला , पैसे नहीं हैं मेरे पास.
खुशी नहीं ये कर के , पर होना नहीं है मुझे उदास .
अभी तो ये ही मेरी ज़िंदगी , चाहे कितना चीखुं रो रो के.
होगा अच्छा जब होना होगा ,
अभी क्यू ना  जियूं मैं खुश हो के.
उन थोडे से शब्दों ने,
मुझे अंदर तक झंकझोर दिया .
असंतोष को तोड़ा मेरे,
धक्का खुशियों की ओर दिया .
उस एक मील के पत्थर ने. मुझे कोसो दूर पहुंचा दिया ...
जो रूखी रूखी रहती थी,
उन्हे  फ़िर  चंचल शाम सा बना दिया .
आयुष जैन
:) 

Wednesday, 16 March 2016

मेरी सुन !

मत भटक मेरे तू मीत मेरी सुन,
पहले मन की प्रीत तेरी सुन !
छोटी हार से सीख बड़ा
सा ,
होगी तेरी जीत मेरी सुन !

माना मन विचलित है तेरा ,  चल हलचल सी रहती है
जिन आंखों से सपने देखे
वो आंखे नम रहती हैं !
मन करता है कोई हमराही आकर के समझा दे,
मन में आत्मविश्वास जगा के राह ठीक सी दिखला दे!
पर सुन इस दुनिया में
कोई जीवन आसान नहीं ,
सबकी अपनी तकलीफें
अपने अपने दर्द गमी !

तो तू खुद ही सोच ये कैसे तुझको प्रेरित करे कोई !
खुद से अच्छी प्रेरणा तुझको ना दे सकता और कोई !
जो है बस सब तू खुद ही है
खुद का खुदा तू खुद ही है
मत तक रे तू राह किसी की
करना सब कुछ खुद ही है !

उठ जाग खड़ा हो पैरो पर
और चल पड़ मंजिल पाने को ,
खुद से खुद में जोश फूंक ले
सफलता की ये रीत मेरी सुन !
क्या है मन की प्रीत तेरी सुन,
होगी तेरी जीत मेरी सुन !!



- आयुष