Tuesday, 16 August 2016

शहीद 🚩

#शहीद

लाड़ला वो सबका ,
था सब से छोटा ,
वर्दी में गया था,
तिरंगे में लौटा .

पर उसकी भौंह पर ,
फक्र ज्यों का त्यों है .
बस एक दुख है
ये आंखें बंद क्यों हैं ?

क्या बचपन के जैसे
मज़ाक कर रहा है ये ,
धड़कते धड़कते दिल
सवाल कर रहा है ये .

लो बता ही दिया उसके
साथियों ने मुझको .
रोक सा दिया इन धड़कती
धड़कनों को.

आन्सू तो आए, पर रोना ना आया ,
लगा जैसे बहुत कुछ अभी मैने पाया .
मेरे दुख और सुख में समर* हो गया ,
मेरा बेटा मर के अमर हो गया .

देश को दिया है कुछ , मैं गर्व में रहूंगा .
मैं सारी दुनिया से अभिमान से कहूंगा ..

वो था प्यारी लोरी ,
राष्ट्र गीत हो गया .
मेरा इकलौता बेटा
शहीद हो गया .

आयुष :)
*समर - युद्ध, सन्ग्राम

Thursday, 11 August 2016

पढाई 📚

काश दुनिया आगे आई ना होती,
काश ज़िंदगी में पढ़ाई ना होती।
ना होता ये डिग्री, ये कॉलेज का झंझट,
ना कोचिंग ना ट्यूशन ना स्कूल का झंझट।
ना कुछ कर गुज़रने की इच्छा होती,
ना होता सफलताएं पाने का झंझट।
गर होनी ही थी, तो एक
जैसी होती,
शहर गांव कस्बों में एक जैसी होती।
नहीं जाना पड़ता फ़िर सब से बिछड़ कर,
शहर में ना बसता मैं घर से पिछड़ कर।
मां रहती, सब रहते, और मैं भी रहता,
मैं सारी तकलीफें उन्हें जाकर कहता।
पढ़ाई लिखाई में घर नहीं बिरसता,
यूं कुछ शब्द कहने को मन नहीं तरसता।
जो उनके लिये करने का सोचा है मैंने,
वो उनके ही संग रह कर मैं करता।
जो लिख लिख के करता हूँ खुद से मैं बातें,
वो सब उनको बताकर करता।
कोई मेरी बातों को 'ऊपर' पहुंचा दो,
पढ़ाई संग मुझे मेरे घर पहुंचा दो।
:)

Wednesday, 27 July 2016

पूर्वा :)


#पूर्वा

ऐ पूर्वा! सुन मेरी , यूं ही बहते बहते .
उसकी ओर चली जा , मेरी बात कहते कहते .
पर शोर कम मचाना , ज़रा हौले से जाना ,
क्या भरोसा  दुनिया का , यहां इंसान हैं रहते .

बिना शब्दों वालीं ये बातें पुरानी ,
हुआ करतीं थी, कभी मुंह ज़ुबानी .
सिर्फ तुझसे कहता हूं, पर वादा ये कर ,
कहीं मेरा किस्सा बन ना जाये कहानी.

मेरे कोरे पत्रों को , उसको दे आना ,
और बदले में बस उसकी , महक तू ले आना .

सुन, पूर्वा ! महक जो तु संग अपने लाती ,
वो मानो की मेरा मनुज्ज्वल कर जाती.
यूं धूल मिट्टी के छोटे छोटे कणौं में ,
कुछ हू ब हू उसकी सूरत बन जाती .

तू धीरे से जाना , और जल्दी से आना ,
मेरी ये कहानी , कहीं मत सुनाना .
और शोर कम मचाना , तू बहते बहते ,
भरोसा नहीं , यहां इंसान हैं रहते !


आयुष :)


Thursday, 16 June 2016

खोया बचपन

वो सादे से क ख ग घ ,
पढे हुए कई साल हो गये,
खूब तज़ुर्बा कमा लिया अब ,
हमे बडे हुए कई साल हो गये !
भागम भाग दौड़ना अब जीवन का हिस्सा है
नंगे पैर यूहीं घांस पे
चले हुए कई साल हो गये

अब तो रुकने के नाम पे
बस चाल धीमी होती है
वो नदिया की धारा में
खडे हुए कई साल हो गये

एसा नहीं की अब  बचपन की याद नहीं आती है ,
आके वो ही तो सूखी
पलकों की प्यास बुझाती है
मां के प्यार से सने वाले वो
अब सूखे सूखे गाल हो गये
प्यार से काढा करती थी वो  अब तो
आडे तिरछे बाल हो गये!

बस रोना और हंसना होता था ,
अब तो जाने कितने हाल हो गये :')
आदत है पर इन सबकी अब
हमे बडे हुए कई साल हो गये ! :')
आयुष :)

Wednesday, 8 June 2016

घर 🏠

घर , जहां खुशियां बसती हैं .
घर जहां खुशियां हंसती हैं .
दिन भर थकने के बाद जहां जाने को जी चाहे.
एक बार मरने के बाद
जहां जीने को जी चाहे.

मन में लालसा लिये , यश कीर्ती कमाने की .
लोभ ये की सारी खुशियां
जीत लें ज़माने की .
चलते चलते जाने कितना दूर आ गया हूं  मैं ,
राह ही नहीं दिखती वापस घर जाने की .

अब तो मोह भंग हो गया है इस सफलता से भी,
त्रप्त और त्रस्त हो गया हूं भाग दौड़ से भी .
नहीं पाना जीत कोई , कोई मंज़िल नहीं पाना .
वो सुकून चाहिये है , हां मुझे अब घर है जाना .




आयुष :')

Thursday, 2 June 2016

चौराहा +

जीवन की इस सरल राह पर आया जो इक चौराहा !
कदम वहीं पर ठिठक गये
किस ओर बढू  , किस राह चलूं ! 

राहें आपस में लड़ती थीं
सब कहती मैं हूं आसान ,
चुनो मुझे और  जल्दी छूलो 
अपने सपनो का आसमान ,

दुविधा में तब मन पड़ जाता
किसे चुनू किसको छोडू
ना जाने क्या मिलना आगे
कहां चलूं किस ओर मुड़ू !

सब पे एक साथ जाने को 
ये पागल मन करता है
पर मन को समझा कर के
दुख के घूंट पिला कर के
इक राह पे आगे बढा दिया
मानो सारी इच्छाओं को मीठी नींद सुला दिया

बस सुकून था इस मसले का 
की अब एक राह होगी
की इन आंखों ने देख लिया फ़िर एक नया चौराहा ! :')
आयुष

Wednesday, 18 May 2016

मेरी कलम

कलम ये मेरे जब तक जी में जान है ,चलती जायेगी .
मैं इसमे ढलता जाऊंगा ,
ये मुझको लिखती जायेगी .
जितनी मुझ में सान्से हैं ,
उतनी स्याही है इस में ,
जितना अनुराग मुझ में है ,
उतना सम्मोहन है इस में .
ये ही मेरी है ज़ुबान,
जो मेरा  अन्तर्मन  लिखती.
जो भी मन में पकता है
वो शब्दों मे परोसती .
मेरे सारे गीत मेरी कलम गाते जायेगी ,
सान्से थमी मान लेना ,
जो मेरी कलम रुक जायेगी .

आयुष :)